Friday, 26 December 2014

My Fevorite

गीत नही गाता हुँ |
बेनकाब चेहरे हैं , दाग बड़े गहरे हैं\ टूटता तिलिस्म,
आज सच से भय ख़ाता हूँ | गीत नही गाता हुँ |
लगी कुछ ऐसी नज़र, बिखरा शीशे सा शहर,
अपनो के मेले में मिट नही पता हूँ, गीत नही गाता हुँ |
पीठ में छुरी सा चाँद, राहु गया रेखा फाँद,
मुक्ता के क्षण में , बार बार बाँध जाता हूँ, गीत नही गाता हुँ |
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.गीत नया गाता हूँ|
टूटे हुए तारों से , फूटे बसंती स्वर.
पत्थर की छाती में उग आया ना अंकुर,
झड़े सब पीले पात, कोयल की कुक रात,
प्राची में अरुणिमा की रेत देख पता हूँ, गीत नया गाता हूँ|
टूटे हुए सपने की सुने कौन सिसकी,
अंतः की चिर व्यथा, पलाको पर ठिठकी,
हार नही मानूगा, रार नही ठानुगा,
कल के कपाल पर लिखता, मिटाता हूँ|
गीत नया गाता हूँ|
                                                                     :- अटल बिहारी बाजपेयी

Thursday, 25 December 2014

हार्दिक पक्तियां

खुशनशिबी से मिली हर खुशी को अब खो दिया करेंगे,
 गर किसी ने पूछा "क्यों", तो जबाब में बस रो दिया करेंगे.
                                       -:रिशु कुमार दुबे  "किशोर":-

ना तेरा हि घर है, ना मेरा हि घर है..
मिले हैं जहां, ये तो बस रहगुज़र है..
खुदा ने बनाई है, दुनियां सिफ़र सी..
मिलेंगे तुम्हें फिर, यही लफ्ज़ पर है..
           -:रिशु कुमार दुबे "किशोर":-

ना वो तूफां रहा, ना वो कश्ती रही। 
ना वो शहर रहा, ना वो बस्ती रही।। 
उस क़यामत को गुज़रे कुछ वक्त गया। 
जब कोई रोता रहा, और वो हंसती रही। 
  -:रिशु कुमार दुबे  "किशोर":-